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विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा

विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा

तमिलनाडु, हरियाणा में कारखाना लगाएगी मोल्ड-टेक पैकेजिंग

हैदराबाद, 18 नवंबर (भाषा) मोल्ड-टेक पैकेजिंग लिमिटेड, आदित्य बिड़ला समूह की जरूरतों और खाद्य एवं रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं के उत्पादों की रणनीतिक रूप से बढ़ती बाजार मांग को पूरा करने के लिए तमिलनाडु के चेय्यार और हरियाणा के विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा पानीपत में संयंत्र स्थापित कर रही है।

कंपनी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि प्रत्येक संयंत्र में 30-30 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

इसमें कहा गया है कि मोल्ड-टेक को हाल ही में आदित्य बिड़ला समूह (पेंट्स उद्योग) से पैकिंग सामग्री की आपूर्ति के लिए आवंटन पत्र (एलओए) मिला है।

कंपनी, पश्चिमी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए 20 करोड़ रुपये के निवेश से दमन में दूसरी विनिर्माण सुविधा भी स्थापित कर रही है। कारखाने के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो गया है।

Petrol Diesel in Rajasthan: क्या बदले पेट्रोल के दाम! जानें आज का रेट

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Petrol Diesel Rate, हर सुबह की तरह आज इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने देश में पेट्रोल डीजल के ताजा रेट जारी कर दिए हैं. राजस्थान में भी पेट्रोल डीजल की कीमती पिछले दिन की तरह ही बरकरार है. यहां 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 108.48 रुपए और 1 लीटर डीजल की 93.72 रुपए ही है.

जयपुर. शनिवार के लिए पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) के ताजा रेट जारी हो गए हैं. क्रूड ऑयल में नरमी का असर इसमें झलक रहा है. तेल कंपनियों की तरफ से जारी ताजा रेट के मुताबिक पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इस तरह देश के लोगों को आज भी पेट्रोल-डीजल के रेट पर कोई राहत नहीं मिली है. कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये के पार ही बिक रहा है. गौरतलब है कि बीते 22 मई के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है और तेल के दाम स्थिर हैं.

राजस्थान में पेट्रोल डीजल: आइए जानते हैं राजस्थान के प्रमुख शहरों में शनिवारको पेट्रोल-डीजल की ताजा कीमत (Petrol Diesel Rate in Rajasthan) क्या है?राज्य के प्रमुख शहरों की बात करें (petrol diesel in Rajasthan) तो जयपुर में पेट्रोल 108.48 रुपए और डीजल 93.72 रुपए प्रति लीटर की दर से मिल रहा है. रेट स्थिर बने हुए हैं. अजमेर में पेट्रोल 108.43 रुपए और डीजल 93.67 रुपए, अलवर में पेट्रोल 109.71 रुपए और डीजल 94.81 रुपए, बीकानेर में पेट्रोल 110.72 रुपए और डीजल 95.75 रुपए, गंगानगर में पेट्रोल 113.65 रुपए और डीजल 98.39 रुपए, जैसलमेर में पेट्रोल 110.71 रुपए और डीजल 95.74 रुपए, जोधपुर में पेट्रोल 109.34 रुपए और डीजल 94.51 रुपए, कोटा में पेट्रोल 108.19 रुपए और डीजल 93.45 रुपए और उदयपुर में पेट्रोल 109.27 रुपए और डीजल 94.44 रुपए लीटर मिल रहा है.

प्रतिदिन अपडेट होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत: बता दें कि विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत के आधार पर पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) की कीमत प्रतिदिन अपडेट की जाती है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज पेट्रोल और डीजल के दाम तय करती हैं. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम तेल कंपनियां हर दिन सुबह विभिन्न शहरों की पेट्रोल और डीजल की कीमतों की जानकारी अपडेट करती हैं.

जानिए आपके शहर में कितना है दाम: पेट्रोल-डीजल की कीमत (Petrol Diesel Price) आप एसएमएस के जरिए भी जान सकते हैं. इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर जाकर आपको RSP और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा. हर शहर का कोड अलग-अलग है, जो आपको आईओसीएल की वेबसाइट से मिल जाएगा. बता दें कि प्रतिदिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है. सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं. पेट्रोल और डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है. इन्हीं मानकों के आधार पर पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं.

शेयर बाजार की फ्लैट ओपनिंग, सेंसेक्स 30 अंक टूटकर खुला, निफ्टी 26 अंक चढ़ा

लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 378 अंक टूटा, भारती एयरटेल टॉप लूजर

LagatarDesk : सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर की फ्लैट ओपनिंग हुई. सेंसेक्स 30 अंक टूटकर 61765 के लेवल पर खुला. जबकि निफ्टी 26 अंक मजबूत होकर 18376 के स्तर पर शुरू हुआ. सुस्ती के साथ खुलने के बाद शेयर बाजार विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा ने तेजी पकड़ी. सेंसेक्स 79.53 अंकों की तेजी के साथ 61874.5 के लेवल पर ट्रेड करने लगा. वहीं निफ्टी 37.60 अंक उछलकर 18387.3 के स्तर पर कारोबार करने लगा. इस दौरान रुपये में भी मजबूती दिखी . डॉलर के मुकाबले रुपया 28 पैसे की उछाल के साथ 80.52 के स्तर पर खुला. (पढ़ें, शिल्पा शेट्टी ने काशी में भोलेनाथ का किया दर्शन, मां के साथ गंगा आरती का उठाया आनंद)

डॉ रेड्डीज लैब्स के शेयर 4.05 फीसदी लुढ़के

आज के कारोबार में 30 शेयरों वाले सेंसेक्स के 22 शेयर हरे निशान पर नजर आ रहे हैं. जबकि 8 शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं. बीएसई सेंसेक्स में लिस्टेड पावरग्रिड के शेयरों में 1.84 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है. जबकि डॉ रेड्डीज लैब्स के शेयरों में 4.05 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है. बीएसई सेंसेक्स में लिस्टेड आज के टॉप गेनर की लिस्ट में पावरग्रिड, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर शामिल हैं. जबकि टॉप लूजर की श्रेणी में डॉ रेड्डीज लैब्स, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, आईटीसी और सनफार्मा के शेयर शामिल हैं.

बीएसई सेंसेक्स के इन शेयरों में तेजी और गिरावट

बीएसई सेंसेक्स में लार्सन एं टुब्रो, इंडसइंड बैंक और टाइटन इंड के शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है. वहीं एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, टीसीएस और बजाज फाइनेंस के शेयर हरे निशान पर नजर आ रहे हैं. इसके अलावा एचयूएल, एनटीपीसी, विप्रो, रिलायंस, इंफोसिस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी, नेस्ले, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल और एक्सिस बैंक के शेयरों में मजबूती नजर आ रही है.

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तिमाही नतीजे के बाद एलआईसी के शेयरों में 8 फीसदी का उछाल

बता दें कि सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ने हाल में तिमाही नतीजे की घोषणा की. रिजल्ट के बाद कंपनी के शेयरों में बंपर तेजी देखी जा रही है. शुरुआती कारोबार में एलआईसी में करीब 8 फीसदी की तेजी देखी गयी. सुबह के 9.26 बजे एलआईसी के शेयरों 669 के स्तर पर ट्रेड कर रहे थे. वहीं रिजल्ट के बाद अरबिंदो फार्मा में करीब 6 फीसदी की गिरावट देखी जा ही है. फिलहाल इसके शेयर की कीमत घटकर 462 रुपये पर आ गयी है.

तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट, उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत नहीं

नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में गिरावट और मांग कमजोर होने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को भी लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट दिखाई दी लेकिन उपभोक्ताओं को इस गिरावट का लाभ फिलहाल मिलना बाकी है।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 4.5 प्रतिशत की गिरावट रही और यहां शाम का कारोबार बंद है। शिकॉगो एक्सचेंज में भी दो प्रतिशत की गिरावट है। विदेशों की इस गिरावट और मांग कमजोर होने से स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों पर दबाव कायम हो गया।

सूत्रों ने बताया कि खाद्य तेल कीमतों की मंदी से तेल उद्योग, किसान परेशान हैं। दूसरी ओर आयातक पूरी तरह बैठ गये हैं, क्योंकि उनपर बैंकों का भारी कर्ज का बोझ आ गया है। सरकार की ‘कोटा व्यवस्था’ के कारण उत्पन्न ‘शॉर्ट सप्लाई’ (कम आपूर्ति) के चलते उपभोक्ताओं को भी खाद्य तेल बाजार टूटने का फायदा नहीं मिल रहा। इसके उलट उन्हें सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल ऊंचे दाम पर खरीदना पड़ रहा है। सरकार को यदि तेल- तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करनी है तो एक प्रकोष्ठ बनाकर नियमित तौर पर तेल-तिलहन बाजार की निगरानी रखनी होगी और किसानों को तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन बढ़ाना होगा।

सूत्रों ने कहा कि 1985 से पहले रिफाइंड नहीं था और उपभोक्ताओं में वनस्पति का प्रचलन था। देशी तेल-तिलहनों (तिल, सरसों, मूंगफली आदि) का मुकाबला आयातित तेल नहीं कर सकते। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, हरदोई, सीतापुर, हल्द्वानी, लखनऊ, रायबरेली जैसे स्थानों पर तिल, सरसों और मूंगफली का अच्छा खासा उत्पादन होता था। इन स्थानों पर तिलहन खेती क्यों प्रभावित हुई इसकी समीक्षा कर फिर से यहां तिलहन खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रयास किये जाने चाहिये। किसानों को अधिक कीमत विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा मिले भी तो देश का पैसा देश में ही रहेगा उल्टे किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और वे तिलहन उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करेंगे। हल्द्वानी में सोयाबीन खूब होती थी जो अब उत्तराखंड में आता है। हल्द्वानी के सोयाबीन से 21-22 प्रतिशत तेल प्राप्ति होती थी जबकि मध्य प्रदेश के सोयाबीन में तेल प्राप्ति का स्तर लगभग 18 प्रतिशत ही है। कर्नाटक में तो हर दूसरे महीने सूरजमुखी की फसल आती थी जो अब लगभग ठप है। पहले पूरे साल में तेल-तिलहन बाजार में पांच प्रतिशत की मंदी-तेजी आती थी लेकिन अब तो हर रोज तेल कीमतों में ऐसा देखने को मिल रहा है। इसे रोकने के समुचित उपाय किये बिना देश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना असंभव है। पिछले लगभग 30 साल से तमाम प्रयासों के बावजूद देश इस मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे आयात पर निर्भर होता गया और अब भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो रही सही उम्मीद खत्म हो जायेगी और देश पूरी तरह आयात पर निर्भर होगा।

सूत्रों ने कहा कि वर्ष 97-98 में खाद्य तेलों के आयात पर भारत लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च करता था जो मौजूदा वक्त में बढ़कर लगभग 1,57,000 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 1991-92 में हम तेल-तिलहन से विदेशी मुद्रा की कमाई करते थे और आज भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खाद्य तेलों के आयात पर खर्च करने लगे हैं।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,275-7,325 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

जरुरी जानकारी | तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट, उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में गिरावट और मांग कमजोर होने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को भी लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट दिखाई दी लेकिन उपभोक्ताओं को इस गिरावट का लाभ फिलहाल मिलना बाकी विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा है।

जरुरी जानकारी | तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट, उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत नहीं

नयी दिल्ली, 17 नवंबर विदेशी बाजारों में गिरावट और मांग कमजोर होने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को भी लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट दिखाई दी लेकिन उपभोक्ताओं को इस गिरावट का लाभ फिलहाल मिलना बाकी है।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 4.5 प्रतिशत की गिरावट रही और यहां शाम का कारोबार बंद है। शिकॉगो एक्सचेंज में भी दो प्रतिशत की गिरावट है। विदेशों की इस गिरावट और मांग कमजोर होने से स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों पर दबाव कायम हो गया।

सूत्रों ने बताया कि खाद्य तेल कीमतों की मंदी से तेल उद्योग, किसान परेशान हैं। दूसरी ओर आयातक पूरी तरह बैठ गये हैं, क्योंकि उनपर बैंकों का भारी कर्ज का बोझ आ गया है। सरकार की ‘कोटा व्यवस्था’ के कारण उत्पन्न ‘शॉर्ट सप्लाई’ (कम आपूर्ति) के चलते उपभोक्ताओं को भी खाद्य तेल बाजार टूटने का फायदा नहीं मिल रहा। इसके उलट उन्हें सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल ऊंचे दाम पर खरीदना पड़ रहा है। सरकार को यदि तेल- तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करनी है तो एक प्रकोष्ठ बनाकर नियमित तौर पर तेल-तिलहन बाजार की निगरानी रखनी होगी और किसानों को तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन बढ़ाना होगा।

सूत्रों ने कहा कि 1985 से पहले रिफाइंड नहीं था और उपभोक्ताओं में वनस्पति का प्रचलन था। देशी तेल-तिलहनों (तिल, सरसों, मूंगफली आदि) का मुकाबला आयातित तेल नहीं कर सकते। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, हरदोई, सीतापुर, हल्द्वानी, लखनऊ, रायबरेली जैसे स्थानों पर तिल, सरसों और मूंगफली का अच्छा खासा उत्पादन होता था। इन स्थानों पर तिलहन खेती क्यों प्रभावित हुई इसकी समीक्षा कर फिर से यहां तिलहन खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रयास किये जाने चाहिये। किसानों को अधिक कीमत मिले भी तो देश का पैसा देश में ही रहेगा उल्टे किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और वे तिलहन उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करेंगे। हल्द्वानी में सोयाबीन खूब होती थी जो अब उत्तराखंड में आता है। हल्द्वानी के सोयाबीन से 21-22 प्रतिशत तेल प्राप्ति होती थी जबकि मध्य प्रदेश के सोयाबीन में तेल प्राप्ति का स्तर लगभग 18 प्रतिशत ही है। कर्नाटक में तो हर दूसरे महीने सूरजमुखी की फसल आती थी जो अब लगभग ठप है। पहले पूरे साल में तेल-तिलहन बाजार में पांच प्रतिशत की मंदी-तेजी आती थी लेकिन अब तो हर रोज तेल कीमतों में ऐसा देखने को मिल रहा है। इसे रोकने के समुचित उपाय किये बिना देश को तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना असंभव है। पिछले लगभग 30 साल से तमाम प्रयासों के बावजूद देश इस मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे आयात पर निर्भर होता गया और अब भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो रही सही उम्मीद खत्म हो जायेगी और देश पूरी तरह आयात पर निर्भर होगा।

सूत्रों ने कहा कि वर्ष 97-98 में खाद्य तेलों के आयात पर भारत लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च करता था जो मौजूदा वक्त में बढ़कर लगभग 1,57,000 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 1991-92 में हम तेल-तिलहन से विदेशी मुद्रा की कमाई करते थे और आज भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खाद्य तेलों के आयात पर खर्च करने लगे हैं।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 7,275-7,325 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,585-6,645 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,100 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,445-2,705 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,240-2,370 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,300-2,425 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,150 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,625-5,725 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,435-5,485 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

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