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क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है?

क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है?
आरबीआई के अधिकारियों ने कहा कि क्रिप्टो करेंसी का बैंकिंग प्रणाली पर भी नकारात्मक असर होगा क्योंकि आकर्षक परिसंपत्तियां होने के कारण हो सकता है।

Petrol Diesel Price changed today in Lucknow Jaipur Noida Gurugram Patna (Jagran File Photo)

Jagran Trending: जानें किन देशों में क्रिप्टोकरेंसी है वैध और किन देशों ने लगाई है पाबंदी

अगर आप बिटकॉइन (क्रिप्टोकरेंसी) में निवेश कर मुनाफा कमाने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको सबसे पहले ये जानना क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? जरूरी है कि बिटकॉइन आपके देश में लीगल भी या नहीं? इसीलिए आज हम आपको यहां बताएंगे कि बिटकॉइन कहां लीगल है और कहां अवैध।

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। क्या आप क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) खरीदने-बेचने या उसमें निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो सबसे पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि क्रिप्टोकरेंसी आखिर आपके देश में लीगल है भी या नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सभी देशों में अलग-अलग नियम हैं। उनमें से कुछ देशों में क्रिप्टोकरेंसी को वर्चुअल रुपये की जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है। मतलब क्रिप्टोकरेंसी से हर वो काम किए जा सकते हैं, जो कि नॉर्मल करेंसी से होते हैं। हालांकि कुछ अन्य देशों में क्रिप्टोकरेंसी खरीदने पर आपको जेल हो सकती है। वहीं, कुछ देशों ने तो इसे विनियमित करने की जहमत तक नहीं उठाई है, क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी अधर में छोड़ दिया है। क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? आइए इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं कि आखिर बिटकॉइन (क्रिप्टोकरेंसी) क्या है और कहां प्रतिबंधित है? कहां कानूनी हैं क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? और कहां न तो कानूनी और न ही अवैध है?

डिजिटल करेंसी नहीं एसेट पर लगा है टैक्स

सबसे पहले तो ये समझिए सरकार ने जो टैक्स लगाया है वो डिजिटल एसेट या यूं कहें क्रिप्टोकरेंसी (Cyrptocurrency) जैसे बिटकॉइन पर लगा है, जो फिलहाल लीगल नहीं है. गौर करने की बात ये है कि सरकार इसे करेंसी नहीं मान रही है. तो अब भारत में डिजिटल एसेट (Cryptocurrency) से होने वाली कमाई पर 30% टैक्स लगेगा. मतलब अब अगर कोई व्यक्ति किसी डिजिटल एसेट (Digital क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? Asset) में निवेश करके 100 रुपए का मुनाफा कमाता है, तो उसे 30 रुपए टैक्स के रूप में सरकार को क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? देने होंगे.

क्रिप्टोकरेंसी के हर एक ट्रांजैक्शन (Transaction) पर अलग से 1% TDS (Tax deduction at source) सरकार को देना होगा. मान लीजिए, किसी ने कोई क्रिप्टोकरेंसी खरीदी हुई है. ये उसका निवेश है. मतलब उसका ये Asset हुआ. अब अगर खरीदने क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? वाला इस एसेट को किसी और को ट्रांसफर करता है, तो उसे अलग से उस Asset की कुल कीमत पर 1% के हिसाब से TDS चुकाना होगा. TDS किसी Source पर लगाया जाता है. जैसे आपको हर महीने मिलने वाली तनख्वाह पर सरकार जो टैक्स लेती है, वो TDS होता है. कुल मिलाकर सरकार डिजिटल करेंसी को एक इनकम सोर्स मान रही है. इसकी कमाई पर 30% टैक्स भी लगा दिया गया है.

तो क्या क्रिप्टो करेंसी लीगल हो गई?

बजट में हुए इस ऐलान के बाद ज्यादातर लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या सरकार ने डिजिटल करेंसी पर टैक्स लगा कर इसे लीगल कर दिया है? जवाब है- नहीं. इसे ऐसे समझिए, सरकार सिर्फ उस डिजिटल करेंसी (Digital Currency) को लीगल यानी वैध मानती है, जिसे Reserve Bank of India-RBI जारी करता है या करेगा. मतलब अभी जो Bitcoin जैसी Crypto Currency हैं, वो वैध नहीं है. बजट भाषण के बाद पत्रकारों से सवाल-जवाब में वित्तमंत्री ने साफ किया कि क्रिप्टो की वैधता को लेकर सरकार में चर्चा जारी है लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? के फ्रेमवर्क के बाहर जो भी क्रिप्टोकरेंसी हैं, वे करेंसी नहीं हैं. अगर कोई आपसे कहे कि ये लीगल हो गई हैं तो जब तक सरकार नहीं कहती, मानिएगा नहीं. यहां पर गौर करने की बात ये भी है कि सरकार अप्रैल क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? से शुरू होने वाले कारोबारी साल में अपनी डिजिटल करेंसी लाने की भी तैयारी में है जिसका जिक्र वित्तमंत्री ने अपने भाषण में किया. जाहिर है ये करेंसी पूरी तरह लीगल होगी.

वर्चुअल एसेट से वित्तमंत्री का मतलब क्या है?

आसान तरीके से समझें तो आप जो सोना खरीदते हैं या जो घर खरीदते हैं, वो आपकी Assets होती है. मतलब आपकी सम्पत्ति, ना कि ये करेंसी है. ठीक इसी तरह Crypto Currency भारत सरकार के लिए एक Asset होगी और इस पर लोगों से टैक्स वसूला जाएगा. अगर आप ये सोच रहे हैं कि Bitcoin, Ethereum, Tether, Ripple जैसी डिजिटल करेंसी को लीगल माना गया है तो तकनीकी तौर पर बिल्कुल सही नहीं है. हालांकि, लोग इसमें निवेश कर सकेंगे.

सरकार के प्रतिनिधियों ने ये भी बताया कि देश में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन साल 2017 से ही सरकार के राडार पर है. इस पर टैक्स लगाने से सरकारी खजाने में मोटी रकम पहुंचनी तय है. अभी अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, Netherlands और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वर्चुअल करेंसी (Virtual Currency) पर वहां की सरकारें टैक्स लगाती हैं. सरकार के इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह ये हो सकती है कि, हमारे देश में जितने लोगों ने CryptoCurrency में निवेश किया है, वो देश की आबादी का लगभग 8% हैं. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इन लोगों ने अपने 70 हजार करोड़ रुपए इस समय ऐसी Virtual Currency में लगाए हुए हैं. पूरी दुनिया में CryptoCurrency में ट्रेड करने के मामले में भारतीय सबसे आगे हैं. सरल शब्दों में कहें तो ये 30 प्रतिशत टैक्स, सीधे तौर पर 70 हजार करोड़ रुपए के निवेश को एक गारंटी देगा और हो सकता है कि भारत में इसका इस्तेमाल बढ़ जाए.

गिफ्ट पर भी लगेगा टैक्स, ऐसे होगा कैलकुलेट

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने वर्चुअल एसेट्स (Virtual Assets) के ट्रांजैक्शन से हुई कमाई पर 30% टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया. क्रिप्टोकरेंसी गिफ्ट करने को भी ट्रांजेक्शन माना जाएगा. मतलब अगर आप क्रिप्टोकरेंसी किसी को गिफ्ट में देते हैं तब भी 30 फीसदी टैक्स की देनदारी बनेगी. गिफ्ट किए जाने के मामले में उस समय की वैल्यू पर टैक्स लगेगा. इस वैल्यू को Recipient का इनकम माना जाएगा और उसे वैल्यू पर टैक्स देना होगा.

एक और बात जो नोटिस करने वाली है कि ये नया टैक्स आने वाले कारोबारी साल यानी 1 अप्रैल से लागू होगा. यानी क्रिप्टो में कारोबार करने वालों के पास फिलहाल 31 मार्च तक की मोहलत है. वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव किया कि डिजिटल एसेट्स के दायरे में क्रिप्टोकरेंसी के अलावा NFT समेत सारे टोकन आते हैं, जो सेंट्रल बैंक के फ्रेमवर्क में नहीं हैं. वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि रिजर्व बैंक की डिजिटल करेंसी आने आने वाली है. ये सारे बदलाव बजट पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद 1 अप्रैल 2022 से लागू हो जाएंगे.

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क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने से पहले जान लें क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में क्या है अंतर

क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने से पहले जान लें क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में क्या है अंतर

TV9 Bharatvarsh | Edited By: सुनील चौरसिया

Updated on: Jan 27, 2022 | क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? 7:18 PM

भारत समेत दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) का जबरदस्त क्रेज चल रहा है. हालांकि, देश में क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर अभी तक कोई साफ तस्वीर दिखाई नहीं दे रही है. सरकार, क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अभी कुछ भी क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? कहना पसंद नहीं कर रही है लेकिन क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर टैक्स (Tax) वसूलने और क्रिप्टो के विज्ञापन (Crypto Advertisements) को लेकर सख्त नियम-कानून बनाने की पूरी तैयारी में है. खैर, ये तो बाद की बात रही लेकिन सच्चाई यही है कि क्रिप्टोकरेंसी में लोग जमकर पैसा लगा रहे हैं. लेकिन क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने की आपाधापी में ये जानना बहुत जरूरी है कि क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में बड़ा अंतर है. आइए जानते हैं कि आखिर क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में क्या अंतर है?

क्या है क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में अंतर

देखा जाए तो क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन फंडामेंटली एक ही है लेकिन असल में ये काफी अलग है. आपको ये जानना जरूरी है कि सभी क्रिप्टो कॉइन, टोकन की कैटेगरी में तो आते हैं लेकिन सभी क्रिप्टो टोकन, क्रिप्टो कॉइन की कैटेगरी में नहीं आते हैं. क्रिप्टो के मामले में सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि क्रिप्टो में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग यही बात नहीं जानते कि वे क्रिप्टो कॉइन में पैसा लगा रहे हैं या क्रिप्टो टोकन में पैसा लगा रहे हैं. दरअसल, क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन दोनों ही डिजिटल संपत्ति है और दोनों के अपने निवेशक हैं. आपको ये जानना बहुत जरूरी है कि क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन को अलग-अलग खास मकसद से बनाया गया है और दोनों का इस्तेमाल भी अलग-अलग है.

क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में एक बड़ा अंतर ये भी है कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ क्रिप्टो कॉइन एक्सेप्ट किए जाते हैं तो कुछ प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ क्रिप्टो टोकन एक्सेप्ट किए जाते हैं. अगर आप क्रिप्टो में दिलचस्पी रखते हैं तो आपको ये जानना भी बहुत जरूरी है कि क्रिप्टो कॉइन ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम करता है लेकिन क्रिप्टो टोकन का कोई ब्लॉकचेन नहीं है. क्रिप्टो टोकन को भी क्रिप्टो कॉइन के ही ब्लॉकचेन पर बनाया जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि क्रिप्टो कॉइन के ब्लॉकचेन पर हजारों क्रिप्टो टोकन्स को होस्ट किया जा सकता है.

बैंक ट्रांजैक्शन की तरह होता है क्रिप्टो कॉइन एक्सचेंज

आपको क्रिप्टो कॉइन और क्रिप्टो टोकन में एक बड़ा अंतर और बताते हैं. क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर जब कभी भी किसी क्रिप्टो टोकन को एक्सचेंज किया जाता है तो वह सीधे-सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास चला जाता है. इसे ऐसे समझें कि आपके पास एक साधारण टोकन है, उसे जब एक्सचेंज किया जाएगा तो आपका वह टोकन उस व्यक्ति के पास चला जाएगा जिससे उसे एक्सचेंज किया गया है. वहीं दूसरी ओर, क्रिप्टो कॉइन के मामले में ऐसा नहीं होता. क्रिप्टो कॉइन एक्सचेंज ठीक बैंक ट्रांजैक्शन की तरह होता है. यानी क्रिप्टो एक्सचेंज में होने वाले ट्रांजैक्शन क्रिप्टो करेंसी का भविष्य क्या है? में सिर्फ अकाउंट बैलेंस में बदलाव होता है जैसे बैंक अकाउंट के बैलेंस में बदलाव होता है. मान लीजिए आपने अपने बैंक अकाउंट से किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करते हैं तो आपके सिर्फ अकाउंट बैलेंस में बदलाव होता है.

क्या सारी क्रिप्टो करेंसी हो जाएंगी बैन?

केंद्र सरकार क्रिप्टो करेंसी को लेकर क्रिप्टो करेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिसियल डिजिटल करेंसी बिल 2021 लाने जा रही है. ये बिल अभी संसद में पेश होना बाकी है. इस स्थिति में अभी इसके बारे में केवल संभावनाएं जताई जा रही हैं. जिसने लोगों में आशंकाएं बढ़ा दी हैं कि अगर सरकार सारी क्रिप्टो करेंसी को प्रतिबंधित कर देगी, तो निवेशकों का नुकसान होना तय है. भारत में जिन लोगों ने इसमें निवेश किया है, वो फंसने की संभावना है. लेकिन, केंद्र सरकार के इस बिल को लेकर सामने आए संकेतों को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की ओर से सभी क्रिप्टो करेंसी पर बैन लगाने की संभावना कम नजर आ रही है. दरअसल, क्रिप्टो करेंसी दो तरह की होती है. पहली पब्लिक और दूसरी प्राइवेट. पब्लिक क्रिप्टो करेंसी को ट्रेसेबल करेंसी कहा जा सकता है. क्योंकि, पब्लिक क्रिप्टो करेंसी के ट्रांजैक्शन एक-दूसरे से लिंक होते हैं और उनके लेन-देन के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है. वहीं, प्राइवेट क्रिप्टो करेंसी में इसके यूजर या लेनदेन की जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाता है. प्राइवेट क्रिप्‍टो करेंसी के यूजर की प्राइवेसी को बनाए रखा जाता है. जिसकी वजह से इसे ट्रेस करना मुश्किल है.

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