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शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए

शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए
एक बार शेयर खरीदकर 2 तरह से पा सकते हैं मुनाफा

शेयर मार्केट में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए? | शेयर बाजार में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए?

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शेयर मार्केट में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए, शेयर मार्केट में कब पैसा कब लगाना चाहिए, शेयर मार्केट में पैसा लगाने का सबसे अच्छा समय कौन सा होता है, शेयर मार्केट में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कब इन्वेस्ट करना चाहिए?

शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने से पहले इन्वेस्टर्स के मन में अक्सर ऐसे सवाल पैदा होते हैं कि आखिर शेयर मार्केट में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए? शेयर मार्केट में पैसा लगाने का सही समय कौन सा होता है? शेयर कब खरीदना और बेचना चाहिए जिससे हम ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट अर्जित कर सकें।

अगर आप सोचते हैं कि शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने का सबसे अच्छा समय कौन सा होता है?

तो आज मैं इस लेख में आपके इन सभी सवालों का जवाब बिल्कुल आसान तरीके से देने वाला हूं आइए जानते हैं―

शेयर मार्केट में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए?

“शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने का सबसे अच्छा सही समय मंदी या फिर गिरावट के वक्त होता है क्योंकि जब पूरा शेयर मार्केट डरा हुआ होता है तो इन्वेस्टर अपने खरीदे हुए शेयर बेचने लगते हैं जिससे आपको मजबूत कंपनियों के शेयर सस्ते दाम में खरीदने को मिल जाते हैं इसीलिए आपको गिरावट के समय शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करना चाहिए।“

अब यह तो बात शॉर्ट में हो गई… शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए लेकिन क्या शेयर मार्केट में अपना मेहनत का पैसा इन्वेस्ट करने के लिए इतना जानना काफी है ?

आपको किसी भी समय शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने से पहले या किसी भी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे कि―

  • कभी भी बिना खुद से रिसर्च किए सिर्फ दूसरों के कहने पर पैनी स्टॉक्स / सस्ते स्टॉक्स या बिना भरोसेमंद कंपनी में पैसा नहीं लगाना चाहिए।
  • शेयर मार्केट को बिना सीखे सिर्फ दूसरों के टिप्स लेकर या फिर दूसरों की बातो में आकर पैसा लगाने से अंत में आप सिर्फ निराशा ही प्राप्त होगी यानी आप अपना नुकसान ही करेंगे।
  • शेयर मार्केट कोई शॉर्ट टर्म का खेल नहीं है जिससे आप रातों-रात शेयर मार्केट से करोड़पति बन जाए।
  • यह एक लंबा खेल है जिसमें आपको पहले शेयर मार्केट की सारी बेसिक चीजें सीखनी पड़ेंगी क्योंकि जो लोग बिना सीखें पैसा इन्वेस्ट करते हैं वही बाद में कहते हैं कि शेयर मार्किट जुआ है।
  • जबकि शेयर मार्केट तो एक ऐसी जगह है जिसमें अगर समझदारी के साथ पैसा इन्वेस्ट किया जाए तो यहीं से वारेन बफ़ेट जैसे दुनिया के सबसे अमीर इन्वेस्टर निकलते हैं और राकेश झुनझुनवाला जैसे बिग बुल भी।
  • शेयर मार्किट में पैसा केवल तभी लगाएं जब आप जिस कंपनी का शेयर खरीद रहे हैं उस पर आपको भरोसा हो। और भरोसा तभी होगा जब आपने उस कंपनी के शेयर के बारे में सही से फंडामेंटल रिसर्च की होगी तभी आप को उस कंपनी के बिजनेस परफॉर्मेंस के बारे में पता चलेगा और आप जानोगे कि वह कंपनी कितने पानी में है।

हर समझदार इन्वेस्टर अपना पैसा इन्वेस्ट करने से पहले घंटों रिसर्च करता है और जब उसे लगता है कि कंपनी में वाकई दम है तभी वह उसका शेयर खरीदने का फैसला करता है।

इस प्रकार वह अपनी समझदारी के द्वारा अपने इन्वेस्ट किए हुए पैसों पर ज्यादा से ज्यादा लाभ या मुनाफा कमा पाता है।

शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करने का सबसे अच्छा समय कौन सा होता है?

अगर मैं शेयर मार्किट में पैसा इन्वेस्ट करने के सबसे अच्छे समय की बात करूं तो आपको पता है कि भारत में शेयर मार्केट 9:15 बजे से 3:30 बजे तक खुला रहता है। तो आपको मार्किट खुलते ही तुरंत इन्वेस्ट नहीं करना चाहिए बल्कि जब आप थोड़ा बहुत वॉल्यूम और ट्रेड देखने लगे तब आपको पैसा लगाना चाहिए।

शेयर मार्किट में वॉल्यूम का मतलब है कि ट्रेडर्स या इन्वेस्टर्स अपने कितने शेयर खरीद और बेच रहे हैं उन्हीं खरीदे और बेचे गए शेयरों की संख्या को वॉल्यूम कहा जाता है।

ज्यादातर ट्रेडर्स ही इंट्राडे ट्रेडिंग के द्वारा वॉल्यूम को घटाते बढ़ाते रहते है।

आप देखेंगे कि शेयर मार्किट में 10:30 से 11:30 बजे के बाद अच्छा खासा वॉल्यूम हो जाता है और तब आप निर्णय ले सकते हैं कि आपको अपना पैसा इन्वेस्ट करना चाहिए या नहीं।

अगर लोग किसी कंपनी के शेयर बहुत ज्यादा बेच रहे हैं और आप सिर्फ इंट्राडे ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो आप भी शार्ट सेलिंग करके उस शेयर से पैसा कमा सकते हैं।

लेकिन मैं आपको बताना चाहूंगा कि इंट्राडे ट्रेडिंग में काफी रिस्क होता है और आपके पैसा नुकसान करने की संभावना भी बहुत ज्यादा होती हैं। इसलिए हमेंशा स्टॉपलॉस जरूर लगाकर रखें।

और मैं तो कहता हूं कि अगर आपको टेक्निकल एनालिसिस अच्छे से शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए आता है तो ही इंट्राडे ट्रेडिंग करें वरना ना करें।

शेयर मार्किट में किस समय पैसा इन्वेस्ट करना चाहिए?

शेयर मार्किट में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए― पैसा इन्वेस्ट करने से पहले आपको यह पता होना बेहद जरुरी है कि शेयर का प्राइस कम या ज्यादा क्यों होता है? क्योंकि जब आप किसी शेयर में पैसा लगाएंगे और जब वह थोड़ा डाउन जाएगा तो आप चिंता में आकर उसे बेचने का निर्णय ले सकते हैं।

जबकि यह आपके लिए पैसा इन्वेस्ट करने का एक सही मौका हो सकता था।

ऐसा सिर्फ उन लोगों के साथ होता है जो न्यूज़ में या फिर किसी एक्सपर्ट से सलाह लेकर किसी शेयर को खरीद तो लेते हैं लेकिन उन्हें पता नहीं होता है कि वह शेयर ऊपर या नीचे क्यों जाता है?

जबकि अगर आपको उस कंपनी के बारे में पता होगा जिस में आप इन्वेस्ट कर रहे हो तो आपको किसी शेयर के भाव बढ़ने या घटने से कोई परेशानी नहीं होगी।

अब आइए अपने सवाल पर आते हैं और उसका जवाब देते हैं कि शेयर मार्केट में कब पैसा इन्वेस्ट करना चाहिए?

शेयर मार्केट में किसी शेयर में आपको उस समय पैसा लगाना चाहिए जब वह अपनी इंटरिंसिक वैल्यू से कम कीमत पर मिल रहा हो। सबसे अमीर इन्वेस्टर वॉरेन बफेट भी इसी तरह वैल्यू इन्वेस्टिंग करके ही सबसे अच्छा और मजबूत शेयर चुनते हैं।

  • क्या आपको पता है आप शेयर मार्किट में सिर्फ तेजी और बढ़ते हुए मार्केट में ही नहीं बल्कि गिरावट या मंदी के समय गिरते हुए मार्केट में भी शार्ट सेलिंग के द्वारा पैसा कमा सकते हैं।

जैसा कि राधा कृष्णदमानी ने हर्षद मेहता स्कैम 1992 के समय किया था।

एक समझदार इन्वेस्टर होने के चलते उन्हें पहले से ही पता था कि बेवजह शेयर का प्राइस बढ़ाया जा रहा था जबकि उन कंपनियों में कोई शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए दम नहीं था। इसलिए उन्हें पता था कि एक ना एक दिन यह बबल जरूर फूटेगा और इन कंपनियों में बहुत बड़ी गिरावट होगी।

1992 में जब इस स्कैम के बारे में लोगों को पता चला तो लोगों ने जिन कंपनियों में अपना पैसा लगाया था तो लोग उन कंपनियों के शेयर बेचने लग गए और इतनी बिकवाली हुई कि पूरा शेयर मार्केट गिर गया।

और जिन लोगों ने उस समय यानी 1992 से पहले हर्षद मेहता के कहने पर या फिर सिर्फ शेयर के चार्ट पेटर्न को देखकर पैसा लगाया था या फिर सिर्फ इसीलिए शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट किया था क्योंकि किसी शेयर का प्राइस लगातार बढ़ रहा था, उन सभी को नुकसान हुआ और इनफैक्ट कुछ लोग तो पूरी तरह से बर्बाद हो गए और सड़क पर आ गए।

इसीलिए आपको शेयर मार्किट में पैसा कब इन्वेस्ट करना चाहिए यह निर्णय बहुत सोच समझ कर ही लेना चाहिए क्योंकि अगर आप बिना सोचे समझे आँख बंद करके किसी के भी कहने पर किसी भी शेयर में पैसा लगा देते हैं तो आप का भी वही हाल हो सकता है जो इन लोगों का हुआ।

और दूसरी तरफ अगर आप समझदारी से एक समझदार इन्वेस्टर की तरह शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करते हैं तो आप ना सिर्फ अपने पैसे पर कई गुना मुनाफा कमाएंगे बल्कि आपको भविष्य में अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता।

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है – What is DELIVERY TRADING?

हर एक निवेशक के लिए डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। डिलीवरी ट्रेडिंग निवेशकों के लिए एक ऐसी विधि मानी जाती है जो उनको एक ही दिन में शेयर खरीद कर जब चाहे बेचने का अवसर प्रदान करती है।

शुरुआत में जो निवेशक डिलीवरी में शेयर खरीदता है वह अपने खरीदे गए शेयर डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर करवाता है। डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक अपनी मर्जी के अनुसार खरीदे हुए शेयरों को लंबे समय तक होल्ड करके अपने पास रख सकता है।

इस प्रक्रिया के लिए उसको किसी भी तरह की मनाही नहीं है। यह अक्सर देखा गया है की डिलीवरी ट्रेडिंग उन्हीं निवेशकों के लिए लाभदायक है जो लांग टर्म इन्वेस्टमेंट में विश्वास रखते हैं। डिलीवरी में निवेश करने के लिए निवेशक के पास पर्याप्त मात्रा में धनराशि होनी चाहिए।

डिलीवरी ट्रेडिंग में ट्रेडर को नुकसान ना के बराबर ही होता है। डिलीवरी ट्रेडिंग एक ऐसा स्रोत है पैसे कमाने का जिसमें की वारेन बुफेट और राकेश झुनझुनवाला जैसे बड़े व्यापारी इसमें अपने पैसे इन्वेस्ट करते हैं।

डिलीवरी ट्रेडिंग के कुछ महत्वपूर्ण नियम होते है:

  • निवेशक को डिलीवरी में शेयर खरीदने के लिए उस कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी होता है।
  • डिलीवरी में खरीदे गए शेयरों को बेचने के लिए सही समय की प्रतीक्षा करें जल्दबाजी में आकर कोई भी निर्णय ना लें जिससे कि आपको हानि हो।
  • निवेशक को डिलीवरी ट्रेडिंग में शेयर अलग-अलग कंपनियों के खरीदने चाहिए जिससे कि उसको आगे जाकर फायदा हो। अच्छी तरह शेयर और अपने फंड को डायवर्सिफाई करने से नुकसान कम होता है।
  • निवेशक के लिए यह जरूरी है कि डिलीवरी ट्रेडिंग करने से पहले उसको उसकी अच्छी तरह से जानकारी ले लेनी चहिये ताकि वह हर एक कदम सोच-समझकर उठाए।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए हर एक ट्रेडर के खाते में पर्याप्त मात्रा में धन होना चाहिए ताकि उसको अपने शेयरों को खरीदने और बेचने के लिए कोई भी दिक्कत ना हो।
  • ट्रेडर को अपने टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस की वैल्यू सेट करके रखनी चाहिए।
  • चाहे आपने शेयर डिलीवरी में लिए हैं लेकिन आपके पास एक स्टॉप लॉस जरूर होना चाहिए और उस स्टॉपलॉस को हिट करते ही आपको जितना नुकसान हो उसी नुकसान में निकल जाना चाहिए। मार्केट के ऊपर जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
  • निवेशक को अपने डिलीवरी ट्रेडिंग के अकाउंट को चलाने के लिए अपने शेयरों का पूरा मूल्य देना होता है।
  • डिलीवरी का कोई भी मार्जिन नहीं होता है जिस के कारण खरीदे गए शेयरों का मूल्य उसी समय चुकाना पड़ता है।

डिलीवरी ट्रेडिंग कैसे करते है?

  • निवेशक को लंबे निवेश के लिए ही डिलीवरी ट्रेडिंग में हिस्सा लेना चाहिए। इसमें ट्रेडर किसी भी नियम से बंधा नहीं होता है। वह अपनी मर्जी से शेयर को खरीद और जब मर्जी बेच सकता। वह शेयर को 2 दिन या 1 साल बाद खरीद या बेच सकता है। डिलीवरी ट्रेडिंग में अगर निवेशक पैसे कमाना चाहता है तो उसे सही समय का इंतजार करना चाहिए और इसके लिए उसको एक बहुत ही परफेक्ट प्लान की भी आवश्यकता होती है।
  • क्योंकि अगर ट्रेडर को डिलीवरी ट्रेडिंग में अच्छा पैसा नहीं मिलता है तो वह अपने अनुसार शेयरों को होल्ड करके रख सकता है। हर एक निवेशक के पास डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए पर्याप्त मात्रा में धनराशि होनी चाहिए। अगर उसके पास पर्याप्त मात्रा में धनराशि नहीं है तो वह शेयर नहीं खरीद सकेगा।

डिलीवरी में ट्रेडिंग करने की फीस:

  • डिलीवरी में शेयर लेने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ज्यादातर स्टॉक ब्रोकर डिलीवरी के लिए ब्रोकरेज फीस नहीं लेते है। जिसका मतलब है कि आपको शेयर खरीदने और बेचने के लिए किसी भी तरह की ब्रोकरेज नहीं देनी पड़ती है।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में सबसे पहला शुल्क जीएसटी का लगता है और जीएसटी का शुल्क ब्रोकर के साथ ट्रांजैक्शन करते वक्त भी देना होता है।
  • डिलीवरी के लिए एसटीटी और सीटीटी का शुल्क भी लगता है।
  • ट्रांजैक्शन चार्जेस भी लगते हैं।
  • 1899 में भारत Stamp Act द्वारा स्टैंप ड्यूटी के नाम का शुल्क भी लगाया गया है।
  • डिलीवरी में आमतौर पर SEBI द्वारा भी शुल्क लगाया जाता है।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक को ब्रोकर द्वारा एक मार्जिन भी दिया जाता है। जिसमें कि वह कम ब्याज दर पर शेयर खरीद सकता है। ब्रोकर निवेशक को शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए इस तरह का मार्जिन बताता है जिसमें कि ब्याज दर बहुत ही कम होता है या फिर ना के बराबर ही होता है ताकि निवेशक डिलीवरी ट्रेडिंग में लंबे समय तक बना रहे।
  • नए निवेशकों को हमेशा मार्जिन ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए क्योंकि इसमें जोखिम होता है। उदाहरण के तौर पर चाहे आपको लाभ हो या हानि हो आपका स्टॉक ब्रोकर आपसे जो भी बनता ब्याज होगा वह जरूर लेगा।

डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे

  • डिलीवरी ट्रेडिंग को सुरक्षित माना जाता है क्योंकि जैसे कि इंट्राडे ट्रेडिंग में एक ही दिन में शेयर खरीदने और बेचने के लिए निवेशक बाध्य होता है। डिलीवरी ट्रेडिंग में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तभी इसमें जोखिम भी कम होता है।
  • शेयर डिलीवरी में लेने का एक और फायदा यह भी है कि इसमें निवेशक शेयरों को अपने पास सही समय आने तक रोक कर रख सकता है।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक लंबे समय के लिए निवेश कर सकता है यह भी ट्रेडर के लिए एक फायदा ही साबित होता है।
  • जब हम डिलीवरी में ट्रेड करते हैं तो हमें मार्केट में आने वाली बुरी खबरें और अच्छी खबरें के प्रभाव से शेयर बाजार में आने वाली तेजी और मंदी से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक जो भी शेयर खरीदता है। वह उसके बोनस का हकदार खुद होता है क्योंकि उसके द्वारा खरीदे गए शेयरों का मालिक वह खुद होता है और बोनस का फायदा भी वह सीधा खुद ही लेता है।
  • शेयर डिलीवरी में पैसा लगाने से आपको उस पैसे से अच्छा मुनाफा हो सकता है।
  • इसमें में आपके पास अच्छे शेयर होने से आप बैंक से बड़ी रकम का लोन भी ले सकते हैं।
  • निवेशक को डिलीवरी ट्रेडिंग में ब्रोकरेज नहीं देना पड़ता है।
  • आप हर तरह के शेयर की डिलीवरी डीमैट अकाउंट ले सकते हैं।

डिलीवरी ट्रेडिंग के नुकसान

  • हर एक निवेशक को डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए एडवांस में पैसा देना होता है और इसके साथ ही अगर आपके पास उचित मात्रा में धन है तो ही आप डिलीवरी में स्टॉक का ट्रेड कर सकते हैं।
  • इसमें निवेशक को धैर्य रखकर लंबे समय का निवेश करना होता है।
  • इसमें स्टॉक मार्केट क्रैश का रिस्क भी बना रहता है।
  • लंबे समय तक निवेश करने से अच्छे रिटर्न आने की गारंटी नहीं होती है।

हम इस बात की आशा करते हैं कि आपको हमारे द्वारा ऊपर दी गई जानकारी में डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है और उसमें कैसे निवेश करना चाहिए इसकी जानकारी अच्छे से मिल गई होगी। आपको इतनी जानकारी तो हो गई होगी की डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेश करने से पहले आपको इसकी अच्छी तरह से रिसर्च करनी जरूरी है। और यह एक लॉन्ग टर्म प्रोसेस है और इसमें निवेश करने के लिए आपको धैर्य रखना आवश्यक होता है। इसमें आपके पास पर्याप्त मात्रा में धन होना भी जरूरी है तभी आप डिलीवरी ट्रेनिंग में निवेश कर सकेंगे। इन बातों के साथ-साथ यह बात तय है कि डिलीवरी ट्रेडिंग में आपको आगे जाकर बहुत ही मुनाफा और अपने आमदनी में वृद्धि देखने को मिलती है।

डिलीवरी में शेयर खरीदने का सबसे बड़ा कारण होता है कि हम अपनी संपत्ति में बढ़ोतरी करना था। इसीलिए इसको लंबे समय में धन अर्जित करने की सबसे अच्छी विधि माना जाता है।

Grow App Pe Share Kaise Sell Karen | Grow App Me Trading Kaise Karen 2022 |

आइए इस आर्टिकल के जरिये Grow App Pe Share Kaise Sell Karen को जनाते है, ग्रो ऐप भारत में बहुत ही तेजी से बढ़ने वाला और बहुत सहज से चलने वाला ऐप है. तो इस आर्टिकल को अंत तक जरुर पढ़िए गई क्यों की इस आर्टिकल के जरिये हम ग्रो ऐप से पैसा कैसे कमाते है उसे भी सीखेंगे.

Grow App Pe Share Kaise Sale Karen

Table of Contents

Grow App Pe Share Kaise Sell Karen ( ग्रो ऐप पे शेयर कैसे बेचें )

Grow App Home Page

Step#2. यहाँ सबसे पहले आपको Stocks पे क्लिक करना है स्टॉक में क्लिक करने के बाद आपके सामने सभी कंपनी का शेयर आपके सामने प्राइस के साथ आजायेगा आप उसमे से जो शेयर खरीदना चाहते है उसे सलेक्ट करें

यदि लिस्ट में कोई शेयर नहीं मिल रहा है तो आप ऊपर Serach Gworw में सर्च कर अपने मन पसंद कंपनी को चुन सकते है .

Step#3. कोई भी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले आपको उसका ग्राफ को क्रमशः D ( Day Wise), W ( Week wise) M ( Month wise) 1Y ( one Year ) इत्यादि को देख लेंगे की उस कंपनी का ग्राफ Loss में जा रहा है या फिर Profit में,

आपको ग्राफ कुछ इस प्रकार दिखाई देगा जैसे की निचे इमेज में दिखाई दे रहा है.

Grow App Share Graph

Step#4. यहाँ पर ग्राफ में एक साल कर ग्राफ देखने में पता चल रहा है की कंपनी का ग्राफ ग्रो किया है इसी तरह दो साल , तिन साल की ग्रो भी देख लेंगे अगर ग्रो सही लगे तो Buy पे क्लिक कर जितना शेयर खरीदना है उसतन खरीद सकते है.

Buy पे क्लिक करते ही आपके सामने खुक इस प्रकार पेज खुल जायेगा जैसे निचे इमेज में दिखाई दे रहा है.

Share Buy Page

Step#5. यहाँ BUY पे क्लिक कर आप शेयर खरीद सकते है अगर आपके ग्रो ऐप के वालेड में पैसा नहीं रहेगा तो आपको पहले मोनी ऐड करने का आप्शन आएगा फिर आप शेयर बाई कर सकते है.

BUY करने के दो या तिन दिन के बाद आप जितना शेयर ख़रीदे होंगे आपके Dashbord में दिखाई देने लगेगा जो की कुछ इस प्रकार दिखाई देगा जैसे निचे इमेज में दिखाई दे रहा है.

Grow App Dashboard

Step#6. यहाँ Dashboard में आप देखेंगे की एक शेयर आज करीदे है इस लिए ऊपर पेंडिंग में दिखाई दे रहा है और निचे पहले से ख़रीदे हुए शेयर का लिस्ट दिखाई दे रहा है ,

तो इस पारकर आप ग्रो ऐप से शेयर खरीद सकते है. ओभी अपने मोबाइल के सहारे घर बैठे.

Grow App Pe Share Kaise Sell करें ( ग्रो ऐप से शेयर बेचने का तरीका )

Step#1. आपको Daishboard में दिखाई दे रहे शेयर के लिस्ट में से जिस कंपनी का शेयर को बेचना है उसे आप सलेक्ट करें , यानि उसके ऊपर क्लिक करें .

Step#2. यदि अच्छा रेट मिल रहा है तो आप उसे Sell पर क्लिक कर उसे बेच सकते है. सेल पर क्लिक करते ही आपके सामने कुछ इस प्रकार पेज खुल जायेगा जैसे निचे इमेज में दिखाई दे रहा है.

Gro App share Sell Page

Step#3. यहाँ Verify Sell पर क्लिक करने से पहले आपको ऊपर कितना शेयर बेचना है उसे सलेक्ट करना है फिर कौन सी कंपनी के जरिये बेचना चाहते है उसे सलेट करे, Price Limit आप जितने रेट पर बेचना कहते है उतना रेट सेट कर सकते है या फिर Market सलेक्ट कर करकेट के रेट अनुसार छोड़ देंगे उसके बाद Verify Sell पर क्लिक करेंगे.

क्लिस्क करते ही आपके सामने OTP Verification Page खुल जायेगा जिसे जैसे निचे इमेज में दिखाई देरहा है.

Grow App TPIN Verify Page

Step#4. यदि आपके पास पहले से ही TPIN है तो आप VERIFY USING TPIN & OTP पे क्लिक करना है और अपना टी-पिन डालकर और मोबाइल पर आये OTP डाल कर आप अपने शेयर को बेच सकते है.

Step#5. यदि आपके पास TPIN नहीं है तो आप निचे Request New TPIN क्लिक करना है आपका पैन नंबर दिखाई देगा आपको नेक्स्ट पर क्लिक करना है फिर आपके मोबाइल नंबर पर TPIN आजायेगा जिसे सेव कर रख लेना है उसके यूज कर आप अपना शेयर बेच सकते है.

तो इस प्रकार आप ग्रो ऐप पे शेयर बेच सकते है ओभी अपने मोबाइल के जरिये घर बैठे ऑनलाइन प्रोसेस.

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शेयर बेचने से सम्बंधित सवाल और उसके जवाब ( FAQ )

Grow App se Share Sell करने में कितना चार्ज लगता है.

ग्रो ऐप से शेयर बेचने में आपको 0.05% Of Trade Value और 20 रुपया ब्रोकेज चार्ज लेना होता है.

ग्रो ऐप से शेयर सेल करने के कितने दिन के बाद पैसा खता में आता है?

यदि आप ग्रो ऐप से शेयर सेल करते है तो उसका पैसा आपके खाते में दो से तिन दिन के भीतर आपके खाते में आजाता है.

कृपया कमेन्ट बॉक्स में सवाल जरुर पूछे

आश करता हूँ की मेरे यह आर्टिकल Grow App Pe Share Kaise Sell Karen या Grow App Se Paise Kaise Kamate Hai, आपको पसंद आया होगा और आपको मन में जो भी डाउट होगा Grow App Me Trading Kaise Karen, से सम्बंधित सारे क्लियर हो गए होंगे.

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यदि अभी भी आपके मन में Grow App Me Trading Kaise Karen से सम्कोबंधित कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेन्ट बॉक्स में लिखर जरुर बताइएगा , मैं आपको जल्द शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए से जल्द रिप्लाई करूँगा.

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पर्सनल फाइनेंस: शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो जानिए इन 5 नियमों के बारे में, आपको खतरे से बचा सकते हैं

शेयर बाजार में निवेश से पैसा बनाने की संभावना एक ऐसा आइडिया है, जो हर नए निवेशक को उत्साहित करता है। साथ ही उन लोगों के लिए भी जो कम अवधि में फायदा कमाना चाहते हैं। हालांकि जब बाजार उतार-चढ़ाव के माहौल में हो, तब किसी भी तरह के तुरंत रिटर्न की संभावना काफी कम हो जाती है। ऐसे में आपको हम बता रहे हैं कि निवेश के समय कौन से नियम का आपको पालन करना चाहिए।

खुद निर्णय न लें

एंजल ब्रोकिंग के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट ज्योति रॉय कहते हैं कि आप खुद निर्णय लेकर अपने लाभ को बढ़ाने के लालच को छोड़ दीजिए। पोर्टफोलियो मैनेजर्स और एक्सपर्ट्स की सलाह पर ध्यान दें। सतर्कता से व सोच-समझकर निवेश करें।

डिविडेंड पर ध्यान दीजिए

जब भी किसी कंपनी के शेयरों में निवेश किया जाता है, तो निवेशक कंपनी के अच्छे प्रदर्शन से लाभ पाने के योग्य होते हैं। जब मुनाफा हो रहा हो तो कंपनियां अक्सर यह तय करती हैं कि वे अपने शेयरधारकों के साथ अपने मुनाफे को बांटें। यह आम तौर पर मुनाफे के एक हिस्से को शेयर करना है, जिसे वे भविष्य के लिए बचाकर रख सकते हैं।

डिविडेंड आमतौर पर वही होता है जो कंपनी आपके द्वारा अर्जित प्रत्येक शेयर पर देने का निर्णय करती है। कंपनियों के रिकॉर्ड और उनके लाभ को जानकर आप अपने निवेश के निर्णय ले सकते हैं।

विविधता पर फोकस करें

यह सबसे स्पष्ट उपाय है, जिसे निवेशकों को आजमाना चाहिए। यह उन्हें अक्सर उतार-चढ़ाव वाले बाजार में बने रहने में सुरक्षा देता है। अधिक जोखिम लेने वाले निवेशक निवेश को कंपनी के शेयरों के हालिया प्रदर्शन ट्रेंड्स के आधार पर देखते हैं। हालांकि शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए इन निर्णयों के समय सलाहकार की मदद काम आ सकती है।

अलग-अलग साधनों में निवेश करें

प्रसिद्ध कहावत है- ‘अपने सभी अंडों को एक टोकरी में नहीं रखना चाहिए’। निवेशकों को इसी का पालन करना चाहिए। एक संतुलित पोर्टफोलियो का निर्माण तभी हो सकता है जब आप अपने निवेश को कई सेक्टर में निवेश करें। बाजार आर्थिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। निवेशकों की भावनाओं में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इससे अनिश्चितता बढ़ रही है। यदि पोर्टफोलियो में विविधता रहती है तो गारंटीड रिटर्न प्राप्त करने में मदद मिलती है।

कंपनियों का विश्लेषण करना

फाइनेंशियल सिस्टम के बारे में जानकारी हासिल करना चाहिए। कब स्टॉक खरीदना है और कब बेचना है, उसे समझें। औसत बाजार के रुझान को समझना आपके लिए आधा काम पूरा कर सकता है। निवेशक अक्सर सेक्टोरल ट्रेंड्स, ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक और कंपनी की घोषणाओं की तुलना करने की गलती करते हैं। बहुत से लोग यह नहीं जानते कि कंपनी की आंतरिक गतिविधियों पर भी बहुत कुछ तय होता है।

कंपनी के मामलों पर नजर रखें

कंपनी के कैश-फ्लो, खर्चों, राजस्व, और उसके निर्णयों को समझना कई पहलुओं में से कुछ एक हैं, जिन पर लोगों को लंबी अवधि के निवेश करने के लिए तैयार होने पर पूरी तरह से रिसर्च करने की आवश्यकता है। निवेशकों के लिए ऐसे पहलुओं पर अपने पोर्टफोलियो मैनेजर्स से सलाह लेना बेहतर होगा, क्योंकि इसमें गहन अध्ययन शामिल है।

सट्टेबाजी से प्रेरित फैसले न लें

अक्सर लोगों को सट्टेबाजी से लाभ होता है और वह इसे ही आधार बना लेते हैं। निरंतर रिटर्न हासिल करने के लिए सट्टेबाजी अच्छा विकल्प नहीं है। यह निरंतर रिटर्न में हानिकारक हो सकता है। बाजार की अटकलों और अफवाहों को फॉलो करना जोखिम हो सकता है। निवेश के प्रमुख तरीकों में से यह भी जानना चाहिए कि न्यूज रिपोर्टों पर फैसला न लें। यह आवश्यक है कि कंपनी के संकट के समय में अपने पोर्टफोलियो को मिस मैनेज न करें और भावनात्मक निर्णय लेकर अपने शेयरों को नहीं बेचें।

कैसे और कब बेचना है

कुछ निवेशकों में जोखिम लेने की ज्यादा चाहत होती है। उनमें कम अवधि के ट्रेड के लिए एक उत्साह हो सकता है। यह संपत्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यह युवा निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त है। ये निर्णय अक्सर बाजार में उतार-चढ़ाव से जुड़े होते हैं, न कि किसी उद्योग या कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा होते हैं। यहां तक कि रिटर्न की भी गारंटी नहीं है, क्योंकि यह सट्टा खेलने जैसा है।

जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, उन्हें बाजार के कम समय के उतार-चढ़ाव या स्टॉक ऑप्शन की मूल्य स्थिरता के आधार पर अपनी खरीदारी या बिक्री का निर्णय नहीं लेने चाहिए। लार्ज-कैप निवेश पर नजर रखते हुए मिड-कैप और स्मॉल कैप निवेशों को छोटे अनुपात में रखना चाहिए। इस तरह जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए।

एक बार शेयर खरीदकर 2 तरह से पा सकते हैं मुनाफा, जानें क्या होता है डिविडेंड

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एक बार शेयर खरीदकर 2 तरह से पा सकते हैं मुनाफा

Dividend Stocks: अमूमन शेयर खरीदने के बाद अगर उसमें ग्रोथ आती है तो उसका फायदा निवेशकों को मिलता है. लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि एक ही जगह निवेश करें और उस पर 2 तरह से आपको मुनाफा हो. बहुत से लोगों को इस बारे में ज्यादा अंदाजा नहीं होगा. शेयर बाजार में यह भी संभव है. इस तरह का फायदा आप ज्यादा डिविडेंड देने वाले शेयरों में निवेश कर उठा सकते हैं.

शेयर बाजार की चाल हर समय एक जैसी नहीं रहती है. बाजार में कभी तेजी आती है तो कभी छोटे सेंटीमेंट से भी बाजार नीचे आने लगता है. जब बाजार में गिरावट शुरू होती है तो कई शेयरों का भाव भी गिरने लगता है और निवेशकों का रिटर्न निगेटिव हो सकता है. ऐसे में निवेशकों के मन में डर भी बैठने लगता है. जो निवेशक ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते हैं, कई बार वे इस कंडीशन में शेयर भी बेचने लगते हैं. अगर आप भी जोखिम नहीं लेना चाहते हैं तो डिविडेंड स्टॉक बेहतर विकल्प है.

क्या है डिविडेंड?

कुछ कंपनियां अपने शेयरधारकों को समय-समय पर अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा देती रहती हैं. मुनाफे का यह हिस्सा वे शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए शेयर को कब खरीदना और बेचना चाहिए देती हैं. इन्हें डिविडेंड यील्ड स्टॉक भी कहते हैं. गर इन कंपनियों के शेयर खरीदते हैं तो इसमें 2 तरह से फायदा होगा.

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Dividend Stocks: 2 तरह से फायदा

  • एक तो फायदा यह होगा कि कंपनी होने वाले मुनाफे का कुछ हिस्सा आपको देगी.
  • दूसरी ओर शेयर में तेजी आने से भी आपको मुनाफा होगा. मसलन किसी कंपनी के शेयर में आपने 10 हजार रुपए निवेश किए हैं और एक साल में शेयर की कीमत 25 फीसदी चढ़ती है तो आपका निवेश एक साल में बढ़कर 12500 रुपये हो जाएगा.
  • ज्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनियों में निवेश का एक फायदा यह है कि आप अपने शेयर बेचे बिना भी इनकम कर सकते हैं.

मुनाफे वाली कंपनियां देती हैं डिविडेंड

आमतौर पर पीएसयू कंपनियां डिविडेंड के लिहाज से अच्छी मानी जाती हैं. जानकारों का कहना है कि अगर कोई कंपनी डिविडेंड दे रही है तो इसका मतलब साफ है कि उस कंपनी को मुनाफा आ रहा है. कंपनी के पास कैश की कमी नहीं है. डिविडेंड देने के ऐलान से शेयर को लेकर भी सेंटीमेंट अच्छा होता है और उसमें तेजी आती है. हालांकि ऐसे शेयर चुनते समय यह ध्‍यान रखना चाहिए कि निवेश उसी कंपनी में करें जिनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर ग्रोथ के साथ रेग्युलर डिविडेंड देने का हो.

ये कंपनियां देती है डिविडेंड

देश में ऐसी कंपनियों की कमी नहीं हैं, जो अपने शेयरधारकों को समय-समय पर डिविडेंड देती हैं. ज्यादा डिविडेंड देने वाली कंपनियों की सूची में कोल इंडिया, वेदांता लिमिटेड, बीपीसीएल, आईओसी, आरईसी, NMDC, NTPC और सोनाटा सॉफ्टवेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं.

(Disclaimer: हम यहां निवेश की सलाह नहीं दे रहे हैं. यह डिविडेंड स्टॉक के बारे में एक जानकारी है. स्टॉक मार्केट के अपने जोखिम है. निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.)

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