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डॉलर की मजबूती

डॉलर की मजबूती
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का जवाब उस दिन आया है जिस दिन डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 82.69 पर पहुंच गया है. यह स्तर अब तक का सबसे निचला है. गिरावट पर अपना तर्क देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि रुपया इसलिए गिर रहा है क्योंकि डॉलर दिन ब दिन मजबूत हो रहा है. उन्होंने कहा कि अपना रुपया कमजोर नहीं हो रहा है. बकौल सीतारमण, रुपया फिसल नहीं रहा बल्कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. अमेरिकी दौरे के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में निर्मला सीतारमण ने यह बात कही.

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डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 83 के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर के मजबूत होने और विदेशी निवेशकों की तरफ से लगातार की जा रही बिकवाली के बीच बुधवार को अमेरिकी करेंसी के मुकाबले रुपया 61 पैसे की गिरावट के साथ पहली बार 83 रुपये के स्तर से नीचे चला गया।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का भी भी रुपये पर असर पड़ा।

अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank foreign exchange market) में रुपया 82.32 पर मजबूत खुला। बाद में रुपये की शुरूआती तेजी जाती रही और कारोबार के अंत में यह अपने पिछले बंद भाव 82.40 प्रति डॉलर के मुकाबले 61 पैसे की गिरावट के साथ अबतक के सबसे निचले स्तर 83.01 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को आंकने वाला डॉलर इंडेक्स 0.31 प्रतिशत बढ़कर 112.48 हो गया।

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.82 प्रतिशत बढ़कर 90.77 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इसके अलावा, बीएसई सेंसेक्स 146.59 अंक की तेजी के साथ 59,107.19 अंक पर पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला जारी है। उन्होंने मंगलवार को 153.40 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

डॉलर के सामने मजबूती से खड़ा है रुपया, भारतीय करेंसी की रिकॉर्ड गिरावट के बीच बोलीं वित्त मंत्री

डॉलर के सामने मजबूती से खड़ा है रुपया, भारतीय करेंसी की रिकॉर्ड गिरावट के बीच बोलीं वित्त मंत्री

अमेरिकी करेंसी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत के रिकॉर्ड स्तर पर गिर जाने के बाद भारतीय मुद्रा की स्थिति को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अहम बयान दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय रुपये की स्थिति पर लगातार करीबी नजर रखे हुए हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया की अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कहीं अधिक मजबूती से खड़ा रहा है। आपको बता दें कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 81 रुपये के पार पहुंच गया। यह ऑल टाइम लो लेवल है। पिछले कुछ महीनों में रुपये डॉलर की मजबूती की कीमत में लगातार गिरावट आई है।

Rupee vs Dollar: रुपया 14 पैसे मजबूत होकर 81.14 प्रति डॉलर पर पहुंचा

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि विदेशी पूंजी की डॉलर की मजबूती आवक बनी रहने से भी भारतीय मुद्रा को समर्थन मिल रहा है। सोमवार को आए आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति और थोक मुद्रास्फीति दोनों में ही गिरावट आई है।

अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 81.18 के भाव पर मजबूती के साथ खुला और थोड़ी ही देर में यह 81.14 के स्तर तक भी पहुंच गया। इस तरह पिछले बंद भाव के मुकाबले रुपये में 14 पैसे की मजबूती दर्ज की गई। पिछले कारोबारी दिवस पर रुपया 50 पैसे की भारी गिरावट के साथ 81.28 के भाव पर बंद हुआ था।

इस बीच अमेरिकी डॉलर की मजबूती को परखने वाला डॉलर सूचकांक 0.30 प्रतिशत बढ़कर 106.97 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.13 प्रतिशत नुकसान के साथ 93.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

डॉलर मजबूत या रुपया कमजोर? मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने बताया क्या है असल माजरा- खुद समझिए और निर्णय लीजिए.

अनिल सिंघवी ने कहा कि हमें सबसे पहले एक साल में क्या हुआ ये समझना जरूरी है. अक्टूबर 2021 में एक डॉलर की वैल्यू लगभग 75 रुपए थी और आज डॉलर के लिए 82.35 रुपए खर्च करना पड़ रहा है.

कमजोर होते रुपए पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक बयान काफी चर्चा में है. उन्होंने कहा था कि दरअसल रुपया नहीं कमजोर रहा बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है. FM का यह बयान देशभर में हॉट टॉपिक (Hot Topic) बना हुआ है. सोशल मीडिया पर मीम्स डॉलर की मजबूती की बाढ़ सी आ गई. हालांकि, हमें वित्त मंत्री के इस बयान को फैक्ट्स के जरिए समझना चाहिए. इस पर ज़ी बिजनेसे मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने अपना डॉलर की मजबूती एनालिसिस दिया.

डॉलर के मुकाबले डॉलर की स्थिति

अनिल सिंघवी ने कहा कि हमें सबसे पहले एक साल में क्या हुआ ये समझना जरूरी है. अक्टूबर 2021 में एक डॉलर की वैल्यू लगभग 75 रुपए थी और आज डॉलर के लिए 82.35 रुपए खर्च करना पड़ रहा है. यानी सालभर में भारतीय रुपया करीब 10 फीसदी कमजोर हुआ है. ऐसे सवाल उठता है कि क्या डॉलर मजबूत हो रहा है या रुपया कमजोर हो रहा है?

वित्त मंत्री #NirmalaSitharaman के बयान के बाद सबसे चर्चित विषय.

उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें समझना चाहिए कि भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले भी ट्रेड करता है और दुनिया की अन्य करेंसी के सामने भी ट्रेड करता है, जिसमें यूरोप का यूरो, ब्रिटेन का पाउंड, जापान का येन समेत अन्य शामिल हैं. ऐसे में हमें कुछ फैक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए.

  • दुनिया की दूसरी बड़ी करेंसी के मुकाबले रुपए का प्रदर्शन कैसा है
  • दुनिया की अन्य करेंसी डॉलर के मुकाबले कैसी हैं
  • अगर रुपया दूसरी करेंसी के सामने भी कमजोर हुआ है, तो रुपया कमजोर हुआ है
  • अगर दूसरी करेंसी भी डॉलर के सामने गिरी हैं तो डॉलर मजबूत हो रहा है

दुनिया की अन्य बड़ी करेंसी के सामने रुपए का प्रदर्शन

ग्रेट ब्रिटेन पाउंड (GBP) के लिए अक्टूबर 2021 में 103 भारतीय रुपए खर्च करने पड़ते थे, जो अक्टूबर 2022 में घटकर 93 रुपए हो गई. यानी पॉउंड से सामने भारतीय रुपया करीब 10 फीसदी मजबूत हुआ है. वहीं यूरो की कीमत सालभर पहले 87 रुपए थी, जो अब 81 रुपए हो गई. यहां भी भारतीय रुपया यूरो के मुकाबले करीब 9 फीसदी मजबूत हुआ है. इसके अलावा जापान की करेंसी येन का भाव अक्टूबर 2021 में 0.65 रुपए थी, जो इस साल अक्टूबर में 0.55 रुपए हो गई. यानी येन के सामने भारतीय रुपया मजबूत हुआ है.

अनिल सिंघवी ने बताया कि भारतीय रुपया केवल डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. जबकि दुनिया की अन्य बड़ी करेंसी के सामने 8 से 10 फीसदी तक मजबूत हुआ है. उन्होंने यह भी बताया डॉलर की मजबूती कि डॉलर क्यों मजबूत हुआ. उन्होंने बताया कि एक साल में डॉलर दुनिया के लगभग सभी करेंसी के मुकाबले मजबूत हुआ है. यह बढ़त करीब 20 फीसदी तक की है. दूसरी ओर भारतीय रुपया केवल 10 फीसदी ही कमजोर हुआ है. इसका मतलब डॉलर की मजबूती है कि भारतीय रुपया अन्य करेंसी के मुकाबले कम कमजोर हुआ है. इसीलिए यह माना जाता है कि रुपए के सामने डॉलर कम मजबूत हुआ है.

डॉलर इंडेक्स क्या होता है?

डॉलर इंडेक्स में दुनिया की 6 बड़ी करेंसी शामिल हैं, जिनको डॉलर के सामने नापा जाता है. इंडेक्स यूरो, पाउंड, येन, स्विस फ्रैंक और स्वीडिश क्रोना शामिल हैं. एक साल में डॉलर इंडेक्स 93 से बढ़कर 112 पर पहुंच गया है. यानी डॉलर इंडेक्स सालभर में करीब 20 फीसदी चढ़ा है.

अनिल सिंघवी के मुताबिक रुपए की कमजोरी में बड़ी भूमिका कच्चे तेल की है. क्योंकि देश के इंपोर्ट बिल में 30 से 40 फीसदी हिस्सेदारी क्रूड का है. ऐसे में जब हम क्रूड के बिल पेमेंट करते हैं तो इसके लिए डॉलर का इस्तेमाल होता है. इसीलिए डॉलर की डिमांड बढ़ती है. दूसरी वजह है अमेरिका में ब्याज दरों में इजाफा होना. इसी साल फरवरी में US में ब्याज दर जीरो था, जो अब बढ़कर 3.5 फीसदी हो गया है. इससे डॉलर में मजबूती आई. चुंकि निवेशक ज्यादा से ज्यादा रकम डॉलर में रखना चाहते हैं, तो ऐसी स्थिति में डॉलर की डिमांड बढ़ती है. क्योंकि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की डिमांड बढ़ती है.

RBI क्यों नहीं दे रहा दखल

निर्मला सीतारमण ने कहा कि रिजर्व बैंक का ध्यान इस बात की ओर ज्यादा है कि बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं हो. इसलिए केंद्रीय बैंक भारतीय करंसी को फिक्स करने के लिए बाजार में कोई दखलंदाजी नहीं कर रहा. लेकिन गिरते रुपये को थामने के क्या उपाय किए जा रहे हैं? इसके जवाब में वित्त मंत्री ने ‘ANI’ से कहा, जाहिर है, अन्य सभी करंसी अमेरिकी डॉलर की मजबूती के खिलाफ टिकी हुई हैं. यह तथ्य की बात है कि भारतीय रुपया लगातार बढ़ते अमेरिकी डॉलर के सामने अपना परफॉर्मेंस जारी रखे हुए है, एक्सचेंज रेट भी डॉलर के पक्ष में जा रहा है. भारतीय रुपये ने कई अन्य उभरती बाजार की करंसी की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है.

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