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बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है

बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है
Which Countries Using Cryptocurrency: भारत समेत इन देशों में आज भी चल रही हैं बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी, जानिए कौन-कौन से देश लगा चुके हैं बैन!

भारत में कैसे खरीदें बिटकॉइन?

WazirX पर बिटकॉइन की ट्रेडिंग आसान इसलिए है क्योंकि WazirX अपने प्लेटफॉर्म पर करीब 52-53 लाख रुपये के बिटकॉइन को अंशों में खरीदने की सुविधा देता है

बिटकॉइन दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। इसमें 2009 में इसकी शुरुआत से अब तक कई गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस साल के शुरुआत से अब तक इसमें 120 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि इस असेट क्लास को बीच में झटके लगे हैं। फिर भी डिजिटल करेंसी ने पूरी दुनिया में जबरदस्त बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है लोकप्रियता हासिल कर ली। अब तो दुनिया के तमाम सेंट्रल बैंक भी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि किस तरीके से डिजिटल करेंसी को मुख्य धारा की मुद्रा के तौर पर मान्यता दी जाए। संस्थागत रूप से मिल रही स्वीकृति बिटकॉइन में जबरदस्त तेजी की अहम वजहों में से एक रही है।

पूरी दुनिया में इन्फ्लेशन (महंगाई) की बढ़ती चिंताओं के बीच बिटकॉइन को सेफ हैवेन असेट (सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प) माना जा रहा है। न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर बिटकॉइन ETF(एक्सचेंज ट्रेड फंड) के हाल में हुए आगाज ने भी बिटकॉइन की कीमतों में जोरदार उछाल में सहयोग किया है। इसके साथ ही अक्टूबर का महीना पूरे स्टॉक मार्केट लिए भी रिकॉर्ड ब्रेकिंग रहा है। इसके अलावा 35 करोड़ यूजर वाले पे पल (PayPal) ने भी क्रिप्टो में होने वाली पेमेंट को मंजूरी दे दी है। इन सब कारणों के चलते 9 नवंबर 2021 को बिटकॉइन की कीमतें 68,641.57 डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गईं।

मीडिया में आई खबरों के बीच भारत में सरकार क्रिप्टो करेंसी पर कानून बनाने पर काम कर रही है। बता दें कि इसके पहले सरकार की तरफ से कई ऐसे बयान आए हैं कि जिसमें कहा गया था कि क्रिप्टो करेंसी पर पूर्ण रूप से बैन लगाया जाएगा। लेकिन अब सरकार के रूख में काफी बदलाव आया है और क्रिप्टो करेंसी के रेगुलेशन पर विचार कर रही है। RBI द्वारा पिछले साल क्रिप्टो करेंसी के बैन को हटाने के बाद भारत में किप्टो की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है।

भारत में कैसे खरीदें बिटकॉइन?

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बिटकॉइन दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। इसमें 2009 में इसकी शुरुआत से अब तक कई गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस साल के शुरुआत से अब तक इसमें 120 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि इस असेट क्लास को बीच में झटके लगे हैं। फिर भी डिजिटल करेंसी ने पूरी दुनिया में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर ली। अब तो दुनिया के तमाम सेंट्रल बैंक भी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि किस तरीके से डिजिटल करेंसी को मुख्य धारा की मुद्रा के तौर पर मान्यता दी जाए। संस्थागत रूप से मिल रही स्वीकृति बिटकॉइन में जबरदस्त तेजी की अहम वजहों में से एक रही है।

पूरी दुनिया में इन्फ्लेशन (महंगाई) की बढ़ती चिंताओं के बीच बिटकॉइन को सेफ हैवेन असेट (सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प) माना जा रहा है। न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर बिटकॉइन ETF(एक्सचेंज ट्रेड फंड) के हाल में हुए आगाज ने भी बिटकॉइन की कीमतों में जोरदार उछाल में सहयोग किया है। इसके साथ ही अक्टूबर का महीना पूरे स्टॉक मार्केट लिए भी रिकॉर्ड ब्रेकिंग रहा है। इसके अलावा 35 करोड़ यूजर वाले पे पल (PayPal) ने भी क्रिप्टो में होने वाली पेमेंट को मंजूरी दे दी है। इन सब कारणों के चलते 9 नवंबर 2021 को बिटकॉइन की कीमतें 68,641.57 डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गईं।

मीडिया में आई खबरों के बीच भारत में सरकार क्रिप्टो करेंसी पर कानून बनाने पर काम कर रही है। बता बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है दें कि इसके पहले सरकार की तरफ से कई ऐसे बयान आए हैं कि जिसमें कहा गया था कि क्रिप्टो करेंसी पर पूर्ण रूप से बैन लगाया जाएगा। लेकिन अब सरकार के रूख में काफी बदलाव आया है और क्रिप्टो करेंसी के रेगुलेशन पर विचार कर रही है। RBI द्वारा पिछले साल क्रिप्टो करेंसी के बैन को हटाने के बाद भारत में किप्टो की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है।

What Is Bitcoin Mining: क्रिप्टो माइनिंग में कजाखस्तान ऐसे बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश, जानिए कितना कमा सकते हैं इस बिजनस से!

What Is Bitcoin Mining: पिछले साल चीन ने अचानक से क्रिप्टोकरंसी माइनिंग (Cryptocurrency Mining) पर पाबंदी लगा दी। कजाखस्तान ने मौके का फायदा उठाते हुए क्रिप्टो माइनिंग शुरू कर दी। आज कजाखस्तान में बिटकॉइन माइनिंग (Bitcoin Mining) का बिजनस खूब फल फूल रहा है। इसकी दो बड़ी वजहे हैं। पहली ये कि वहां बिजली सस्ती है और दूसरी ये कि वहां सरकार की नीतियां बिटकॉइन माइनिंग के समर्थन में हैं।

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What Is Bitcoin Mining: क्रिप्टो माइनिंग में कजाखस्तान ऐसे बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश, जानिए कितना कमा सकते हैं इस बिजनस से!

कजाखस्तान में क्रिप्टोमाइनिंग से खूब कमा रहे लोग

मर्दों के रसूख वाले क्रिप्टो माइनिंग के कारोबार में एक महिला मोल्दिर शुभायेवा ने एंट्री मारकर एक मिसाल कायम की है। मोल्दिर शुभायेवा पिछले करीब 4-5 सालों से क्रिप्टो माइनिंग का बिजनस कर रही हैं। वह अपने काम के लिए कितनी समर्पित हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि कई बार वह अधिक काम होने के चलते दफ्तर में ही सो जाती हैं। करीब 5 साल पहले बिटकॉइन माइनिंग में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। इसके बाद उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर घर में ही बिटकॉइन माइनिंग की। नतीजे अच्छे मिले तो उसे बड़े लेवल पर करने की सोची और आज वह बिटकॉइन माइनिंग से खूब कमाती हैं। उन्हीं की तरफ बहुत सारे लोग कजाखस्तान में क्रिप्टोमाइनिंग के जरिए खूब कमा रहे हैं।

कजाखस्तान में क्यों फल-फूल रहा है क्रिप्टो माइनिंग बिजनस

आज के वक्त में कजाखस्तान बिटकॉइन माइनिंग में 18 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है। कजाखस्तान में क्रिप्टोमाइनिंग के बिजनस ने 2019 में तेजी पकड़ी। कजाखस्तान में इस बिजनस के फलने-फूलने की दो वजहें हैं। पहला तो ये कि वहां बिजली सस्ती है, दूसरा ये कि सरकार की नीतियां इसके खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, अधिक बिजली के लिए अधिक कोयला जल रहा है, जिससे प्रदूषण खूब फैल रहा है। कजाखस्तान में तेजी से बढ़ी क्रिप्टोमाइनिंग से कंप्यूटर और खासकर ग्राफिक्स कार्ड की तगड़ी मांग पैदा हुई।

क्या होती है बिटकॉइन माइनिंग?

माइनिंग का नाम सुनते ही सबसे पहले सोने, हीरे या कोयले की खुदाई का ख्याल मन में आता है। क्रिप्टो माइनिंग या बिटकॉइन माइनिंग का मतलब पजल्स को सॉल्व करके नई बिटकॉइन बनाना है। चलिए थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं। जिस तरह हम किसी को पैसे भेजने को लिए कोई ट्रांजेक्शन करते हैं तो वह पहले बैंक के पास जाती है और फिर बैंक उसे वैलिडेट कर के आगे भेजता है। क्रिप्टोकरंसी के मामले में कॉइन भेजने वाले उसे रिसीव करने वाले के बीच में बैंक जैसा कुछ नहीं होता है, बल्कि सिर्फ कंप्यूटर्स होते हैं। इन कंप्यूटर्स को कुछ लोग चलाते हैं, जिसके जरिए हर ट्रांजेक्शन वैलिडेट होती है। उनकी इस मेहनत के बदले उन्हें बिटकॉइन मिलते हैं। इसे ही बिटकॉइन माइनिंग कहते हैं। अन्य क्रिप्टोकरंसी में भी इसी तरह माइनिंग होती है।

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी को भी आसान भाषा में समझें

जब कोई शख्स किसी दूसरे शख्स को क्रिप्टोकरंसी भेजता है, तो वह ट्रांजेक्शन कंप्यूटर्स के पास जाती है। इनके जरिए क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन को वेलिडेट किया जाता है और इन्हें डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में शामिल किया जाता है। यह सारी ट्रांजेक्शन एक ब्लॉक में दर्ज होती हैं और बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है इस ब्लॉक की साइज करीब 1 एमबी की होती है। जब एक ब्लॉक भर जाता है तो उसे ब्लॉक कर के नया ब्लॉक बनाया जाता है और नए ब्लॉक को पहले वाले ब्लॉक से जोड़ा जाता है। यह सारे ब्लॉक एक दूसरे से जुड़े रहते हैं, जिससे एक चेन सी बन जाती है। इसी वजह से इसे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी कहा जाता है।

माइनर्स निभाते हैं अहम भूमिका

डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता है। यही वजह है कि बिटकॉइन के डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में केवल मान्यता प्राप्त माइनर्स को ही डिजिटल लेजर में ट्रांजैक्शंस अपडेट करने की अनुमति है। इस तरह यह सुनिश्चित करना माइनर्स का काम है कि नेटवर्क पर डबल स्पेंडिंग न हो। इसी वजह से ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है, जिसमें पूरी चेन में जुड़े हर कंप्यूटर पर जानकारी मौजूद होती है, जिससे यह तकनीक बेहद सुरक्षित बन जाती है।

यूं होती है माइनिंग से कमाई

नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए माइनर्स को इनाम के तौर पर नए कॉइन दिए जाते हैं। चूंकि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर्स में कोई केंद्रीय अथॉरिटी नहीं है, इसलिए ट्रांजैक्शंस को वैलिडेट करने के लिए माइनिंग प्रोसेस बहुत अहम है। केवल मान्यता प्राप्त माइनर्स को ही डिजिटल लेजर में ट्रांजैक्शंस अपडेट करने की इजाजत है। इसके लिए प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) consensus protocol बनाया गया है। PoW नेटवर्क को बाहरी हमलों से भी बचाता है।

एडवांस मशीनों की होती है जरूरत

क्रिप्टो माइनिंग एक तरह से बहुमूल्य धातुओं की माइनिंग की तरह है। जिस तरह सोना, चांदी या हीरे को निकाला जाता है, उसी तरह क्रिप्टो माइनर्स सर्कुलेशन में नए कॉइन रिलीज करते हैं। इसके लिए ऐसी मशीनों को काम पर लगाया जाता है जो गणित के जटिल समीकरणों को सुलझाते हैं। इन समीकरणों की जटिलता लगातार बढ़ती ही जा रही है। समय के साथ-साथ माइनर्स ने PoW को सुलझाने के लिए ज्यादा एडवांस्ड मशीनों को लगाया है। माइनर्स के बीच प्रतिस्पर्द्धा बढ़ने से क्रिप्टोकरेंसी की कमी भी बढ़ी है।

कौन कर सकता है माइनिंग?

क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग के लिए ऐसे कम्प्यूटर चाहिए, जिनमें जटिल क्रिप्टोग्राफिक मैथमेटिक इक्वेशंस को सॉल्व करने के लिए स्पेशल सॉफ्टवेयर हो। बिटकॉइन के शुरुआती दिनों में इसे होम कम्प्यूटर से एक सिंपल सीपीयू चिप से माइन किया जा सकता था, लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। आज इसके लिए स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। इसे चौबीसों घंटे भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्शन के साथ जोड़े रखना पड़ता है। हर क्रिप्टो माइनर के लिए ऑनलाइन माइनिंग पूल का मेंबर होना जरूरी है।

Which Countries Using Cryptocurrency: भारत समेत इन देशों में आज भी चल रही हैं बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी, जानिए कौन-कौन से देश लगा चुके हैं बैन!

Which Countries Using Cryptocurrency: चीन ने क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) से जुड़ी ट्रांजेक्शन को अवैध करार देते हुए बिटकॉइन समेत सभी क्रिप्टोकरंसी पर बैन (China ban cryptocurrency) लगा दिया है। वहीं दूसरी ओर भारत में अभी भी क्रिप्टोकरंसी (Bitcoin in india) बैन नहीं है। भारत सरकार कई सालों से इस पर बैन लगाने की कोशिशें कर रही है, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही।

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Which Countries Using Cryptocurrency: भारत समेत इन देशों में आज भी चल रही हैं बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी, जानिए कौन-कौन से देश लगा चुके हैं बैन!

भारत में बिटकॉइन पर नहीं लग पा रहा बैन!

बिटकॉइन का इस्तेमाल करने वाले देशों की लिस्ट में पहला नाम आता है भारत का। हालांकि, यहां की सरकार लगातार इसे बैन करने की कोशिशें कर रही है, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। अप्रैल 2018 में रिजर्व बैंक ने क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगाया ता, लेकिन 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने इसके उलट फैसला दे दिया। मई 2021 में रिजर्व बैंक ने बैंकों को क्रिप्टोकंरसी का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी। हालांकि, सरकार का बिटकॉइन पर कोई कंट्रोल नहीं है यानी वह इसमें निवेश करने वालों के हितों की रक्षा नहीं कर सकती है। यही वजह है कि सरकार इसे बैन करने की कोशिशें कर रही है। कोई कंट्रोल ना होने की वजह से यहां बिटकॉइन पर कोई टैक्स भी नहीं लगता।

इन देशों में भी चलता है बिटकॉइन

  • अमेरिका में भी बिटकॉइन चलता है। वहां पर डिश नेटवर्क, माइक्रोसॉफ्ट, सबवे और ओवरस्टॉक जैसी कंपनियां बिटकॉइन में भुगतान स्वीकार करती हैं।
  • अमेरिका की तरह ही कनाडा में बी बिटकॉइन का खूब इस्तेमाल होता है। कनाडा रेवेन्यू एजेंसी तो बिटकॉइन को एक कमोडिटी की तरह देखती है और इसके हुई कमाई को बिजनस इनकम माना जाता है। उस पर टैक्स भी लिया जाता है।
  • अगला नाम है ऑस्ट्रेलिया का, जहां पर बिटकॉइन अभी भी इस्तेमाल होता है। ऑस्ट्रेलिया में इसे ना तो विदेशी मुद्रा की तरह देखा जाता है ना ही पैसों की तरह देखते हैं। इसे असेट की तरह देखा जाता है और कैपिटल गेन टैक्स भी लगाया जाता है।
  • इनके अलावा फिनलैंड, बेल्जियम, बुल्गारिया और अल सल्वाडोर जैसे देशों में भी बिटकॉइन का इस्तेमाल किया जाता है।

ये देश लगा चुके हैं बिटकॉइन पर बैन

  • बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगाने वाले देशों में चीन भी शामिल हो गया है।
  • रूस में बिटकॉइन पर पहले से ही बैन है और वहां बिटकॉइन में भुगतान करना अवैध है।
  • वियतनाम ने भी बिटकॉइन पर बैन लगाया हुआ है।
  • इसका अलावा बोलिविया, कोलंबिया और एक्वाडोर जैसे देशों ने भी बिटकॉइन और बाकी क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगाया हुआ है।

आखिर क्यों बिटकॉइन है खतरनाक

बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करेंसी में कभी भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल जाता है। पिछले सालों में बिटकॉइन का उपयोग क्यूँ किया जाता है कई मौकों पर बिटकॉइन बिना कोई संकेत दिए ही 40-50 फीसदी गिर गया। 2013 में अप्रैल महीने में बिटकॉइन की कीमत एक ही रात में 70 फीसदी से अधिक गिरी थी। 233 डॉलर तक जा पहुंचा बिटकॉइन अचानक गिरकर 67 डॉलर पर आ गया। कई देशों में बिटकॉइन पर अभी भी ट्रेडिंग होती है, लेकिन इसमें निवेश करना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। बिटकॉइन की सबसे खराब बात ये है कि इसका अधिकतर इस्तेमाल हैकिंग, ड्रग्स सप्लाई और हथियारों के अवैध खरीद-फरोख्त जैसे कामों में होता है, जो गैरकानूनी है।

Cryptocurrency: निजी क्रिप्टोकरेंसी क्या है? क्यों सरकार ने की इसको लेकर टेढ़ी निगाहें, जानें सबकुछ

भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी (private cryptocurrencies) को प्रतिबंधित किया जा सकता है।

Image: Shutterstock

खबर है कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी ( cryptocurrencies) को लेकर संसद में एक विधेयक पेश करने वाली है। कुछ को छोड़कर भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी (private cryptocurrencies) को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इस खबर के साथ ही सभी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी पिछले कुछ घंटों में नीचे की ओर आने लगी। केंद्र सरकार अपना नया क्रिप्टोकरेंसी लाने की भी योजना बना रही है।

केंद्र अब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के निर्माण के लिए एक अनुकूल ढांचा बनाने की योजना बना रहा है। 'द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021' आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किए जाने की योजना है।

निजी क्रिप्टोकरेंसी टोकन

हाल ही में, क्रिप्टोकरेंसी की मांग तेजी से बढ़ी है। जबकि 2021 में बड़ी संख्या में नए क्रिप्टो निवेशक बाजार में आए, एथेरियम, बिटकॉइन और शीबा इनु जैसे कई सिक्कों ने उनके नाम का फायदा उठाया। ब्लॉकचेन तकनीक बिटकॉइन जैसे सिक्कों का उपयोग सुरक्षित और गुमनाम होने के लिए करती है। इनमें से कुछ सिक्के लेनदेन के मामले में अधिक निजी होते हैं। कुछ प्रमुख निजी करेंसी उपयोगकर्ताओं की पहचान और गतिविधियों को छुपाकर रखते हैं।

Monero (XMR): मोनेरो एक लोकप्रिय टोकन है जो मुख्य रूप से उपयोगकर्ताओं को गुमनाम करने में मदद करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। कई अन्य टोकन की तुलना में एक्सएमआर में लेनदेन का पता लगाना मुश्किल है क्योंकि वे रिंग सिग्नेचर का उपयोग करते हैं। ये विधियां किसी भी प्रकार के लेनदेन के लिए उपयोगकर्ता की पहचान छुपाकर सुरक्षित बबल प्रदान करती हैं। CoinMarketCap के अनुसार 24 नवंबर को सुबह 9:30 बजे तक XMR 240.68 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

Dash coin: डैश एक और क्रिप्टोक्यूरेंसी है जो अपने उपयोगकर्ताओं को गुमनामी प्रदान करता है। डैश सिक्का अपने व्यापारियों को लेनदेन निजी हैं या नहीं यह चुनने की अनुमति देता है। इसकी PrivateSend सुविधा उपयोगकर्ताओं को कुछ देशों के नियामक मानकों के खिलाफ सिक्कों का उपयोग करते समय सुरक्षित रहने की अनुमति देता है।CoinMarketCap के अनुसार 24 नवंबर को सुबह 9:30 बजे तक डैश 192.56 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

Zcash (ZEC): Zcash खुद को मार्केट लीडर बिट कॉइन की तुलना में अधिक उन्नत टोकन होने का दावा करता है। अपनी बढ़ी हुई सुरक्षा और गोपनीयता सुविधाओं को रेखांकित करते हुए, ZEC दुनिया में डिजिटल मुद्रा का सबसे सुरक्षित रूप होने का दावा करता है। जीरो-नॉलेज प्रूफ क्रिप्टोग्राफिक टूल को लागू कर प्रतिभागियों को लेनदेन को ढालने का विकल्प प्रदान करता है। ZEC को सही मायने में सर्वश्रेष्ठ निजी क्रिप्टोकरेंसी में से एक माना जाता है। CoinMarketCap के अनुसार, 24 नवंबर को सुबह 9:30 बजे तक Zcash USD 256.42 पर कारोबार कर रहा था।

Verge (XVG): Verge अभी तक एक और निजी सिक्का है जो उपयोगकर्ता की पहचान छुपाता है। हालांकि, XVG उपयोगकर्ताओं की पहचान की सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफ़िक तकनीकों के बजाय द ओनियन राउटर (टीओआर) और अदृश्य इंटरनेट प्रोजेक्ट (I2P) की मौजूदा और परीक्षण की गई तकनीक का उपयोग करता है। CoinMarketCap के अनुसार 24 नवंबर को सुबह 9:30 बजे तक Verge USD 0.02464 पर कारोबार कर रहा था।

Beam: ये एक टोकन है जो मुख्य विशेषताओं के साथ सुरक्षा पर बहुत अधिक केंद्रित है जिसमें उपयोगकर्ता की गोपनीयता पर पूर्ण नियंत्रण शामिल है। बीम पर सभी लेन-देन का डिफ़ॉल्ट रूप से निजी होने का दावा किया जाता है। ब्लॉकचेन कोई पता या अन्य निजी जानकारी संग्रहीत नहीं करता है।

अधिक निजी क्रिप्टोकरेंसी

  • Grin
  • Horizen (ZEN)
  • ByteCoin (BCN)
  • Firo (FIRO)
  • Super Zero Protocol (SERO)
  • BTCX India
  • UCoin
  • Delta

बिटकॉइन जैसे बड़े सिक्के अधिकारियों द्वारा आसानी से खोजे जा सकते हैं, ऊपर बताए गए निजी सिक्के डेटा को सुरक्षित रखने का दावा करते हैं। सभी शीर्ष निजी सिक्के कई हैकिंग प्रयासों को भी रोकते हैं। हालांकि, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नियामकों द्वारा ऐसे सिक्कों के बड़े लेन-देन किए जाने वाले लोगों की जांच कर सकता है। बड़े लेनदेन करते समय पहचान छिपाकर रखना चिंता का विषय है। भारत सरकार अब इन सिक्कों पर प्रतिबंध लगाने और आरबीआई के डिजिटल पैसे को स्थापित करने पर विचार करेगी।

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